नई दिल्ली। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों की त्वरित सुनवाई और दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और सरकार ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री की यह घोषणा ऐसे समय आई है, जब राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन जारी है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर हैं।
प्रधानमंत्री के बयान पर कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था को सबसे अधिक नुकसान वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हुआ है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने शिक्षा प्रणाली को कमजोर होने दिया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
इससे पहले राहुल गांधी ने छात्रों से जुड़े मुद्दों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई की जांच और प्रधानमंत्री द्वारा छात्रों से माफी मांगने की मांग की।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं केवल भाजपा शासित राज्यों तक सीमित नहीं हैं और कांग्रेस को अपने शासनकाल के मामलों पर भी जवाब देना चाहिए।
फिलहाल, पेपर लीक का मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। केंद्र सरकार के फास्ट ट्रैक कोर्ट संबंधी ऐलान के बाद अब सभी की नजर इसके क्रियान्वयन और आगामी कानूनी कार्रवाई पर रहेगी।
